
एक झलक:
आप जानते हैं कि आपमें क्या-क्या चीज अच्छी नहीं हैं। आप जानते हैं कि आपमें क्रोध है। क्रोध बाहर से नहीं आता है। क्रोध आपके अंदर से आता है और जहां आप जाते हैं, आपका क्रोध आपके साथ जाता है। आपका संशय भी आपके साथ जाता है। परंतु जैसे सिक्के का एक side नहीं हो सकता। एक तरफ अंधेरा है तो दूसरी तरफ उजाला है। एक तरफ अगर doubt है तो दूसरी तरफ clarity है। एक तरफ अगर anger है तो दूसरी तरफ compassion है। इन सारे attributes को आप जानते हैं ये आपके अंदर है। जब आपको कहीं गुस्सा होना पड़ता है तो ये थोड़े ही है कि वो एस.एम.एस. के रूप में आपके फोन में आता है ? नहीं! वो तो आपके अंदर है! कहीं भी। पर क्या आप जानते हैं कि उसके दूसरी तरफ क्या है ? उस गुस्से के दूसरी तरफ compassion है। पर हम अपने जीवन में इस बात पर कभी ध्यान नहीं देते हैं।
- श्री प्रेम रावत

एक झलक
एम् सी:
प्रेम जी, आप दुनिया के कोने कोने में जाकर लोगों से मिले हैं। उनको नज़दीक से जानने और समझने का मौका मिला है। क्या सबका दुःख, दर्द एक जैसा ही होता है ? क्या हर किसी को शांति की तलाश है ? क्या आपका संदेश उन सबके लिए एक ही है ?
श्री प्रेम रावत:
ये भी एक बड़ा अच्छा सवाल है। क्योंकि बनाने वाले को अच्छी तरीके से मालूम था, लोग कहेंगे "मैने कोने कोने में ढूँढा"। इसीलिए भगवान् ने इस सृष्टि को, इस पृथ्वी को गोल बना दिया, ताकि कोना है ही नहीं इसमें।
दुःख के कारण अलग अलग हैं। दुःख के कारन अलग अलग हैं। पर दुःख का एहसास वही है।

कितना घमण्ड करता है मनुष्य! मैं देखता हूं अपने जीवन के अंदर। मैं बहुत जगह जाता हूं। जहां देखता हूं — किसी को किसी चीज का घमण्ड है, किसी को किसी चीज का घमण्ड है, किसी को किसी चीज का घमण्ड है, किसी को किसी चीज का घमण्ड है।
कोई अपनी पढ़ाई पर घमण्ड करता है, कोई अपने नाम पर घमण्ड करता है, कोई अपनी दौलत पर घमण्ड करता है। जो-जो मनुष्य ने हासिल किया, उस पर घमण्ड करता है। परंतु ये इसलिए घमण्ड करता है, क्योंकि उसको याद नहीं है कि एक दिन उसको जाना है और जिस दिन उसको यह बात स्पष्ट हो जाएगी कि जाना है, तो घमण्ड करने का फायदा क्या?
- प्रेम रावत

कितना घमण्ड करता है मनुष्य! मैं देखता हूं अपने जीवन के अंदर। मैं बहुत जगह जाता हूं। जहां देखता हूं — किसी को किसी चीज का घमण्ड है, किसी को किसी चीज का घमण्ड है, किसी को किसी चीज का घमण्ड है, किसी को किसी चीज का घमण्ड है।
कोई अपनी पढ़ाई पर घमण्ड करता है, कोई अपने नाम पर घमण्ड करता है, कोई अपनी दौलत पर घमण्ड करता है। जो-जो मनुष्य ने हासिल किया, उस पर घमण्ड करता है। परंतु ये इसलिए घमण्ड करता है, क्योंकि उसको याद नहीं है कि एक दिन उसको जाना है और जिस दिन उसको यह बात स्पष्ट हो जाएगी कि जाना है, तो घमण्ड करने का फायदा क्या?
- प्रेम रावत

ऐंकर : तो ये आपको हजारों लोग, लाखों लोग सुनने आते हैं और आप उनको शांति का, प्रेम का, मानवता का संदेश दे रहे हैं। क्या कुछ ऐसे उदाहरण आप हमारे सामने रख सकते हैं कि आपकी बात से, आपकी सोच के कारण कई लोगों के जीवन में बदलाव आया ?
प्रेम रावत जी : देखिए! मैं अपनी प्रशंसा अपने मुंह से नहीं करना चाहता हूं। पर मैं आपको एक बात बताता हूं, जो मैंने देखा है कि बहुत सारे जेलों में हमारे वीडियोज़ जाते हैं और ‘पीस एजुकेशन प्रोग्राम’ एक हमारा है, जो कि जेलों में दिखाया जाता है।
ऐंकर : अच्छा!
प्रेम रावत जी : अब ये क्यों ?
ऐंकर : जी!
प्रेम रावत जी : हम धर्म की बात नहीं करते हैं। हम कर्म की बात नहीं करते हैं। हम विचारने की बात करते हैं, क्योंकि एक बार आप सोचें, फिर क्या करना है, ये आप अपने जीवन में निर्णय ले सकेंगे और सही निर्णय ले सकेंगे।

प्रेम रावत:
सबसे बड़ी बात है कि आप लोग यहां आये और आप शांति में दिलचस्पी रखते हैं। यह अपने में एक बहुत बड़ी बात है। छोटी बात नहीं है। मैं कुछ चीजें आपको कहूंगा जिन पर आप विचार करिये। अगर इस सारे संसार को देखा जाये तो मनुष्य को क्या-क्या चाहिए, मनुष्य की जरूरतें क्या हैं ? असली जरूरत। मैं उन चीजों की बात कर रहा हूं जिनके बिना मनुष्य जीवित नहीं रह सकेगा। सो, एक तो उसको भोजन चाहिए क्योंकि अगर उसको दो हफ्ते, तीन हफ्ते, अगर उसको भोजन नहीं मिला तो यह शरीर जो है, शट डाउन, गया। उसको हवा चाहिए अगर उसको हवा नहीं मिली, स्वांस, तीन मिनट, चार मिनट, पांच मिनट। अब कई लोग हैं, जो कहते हैं कि हम तो इससे ज्यादा रोक सकते हैं। परंतु उनको कहिए कि अच्छा, रोकिये, तो वो बड़ी स्वांस लेंगे पहले। नहीं, सारी स्वांस निकाल कर के रोकिये। क्योंकि अगर जब आपने इतने अपने लंग्स भर लिए हैं ऑक्सीजन से, तो आप अभी भी हवा सप्लॉय कर रहे हैं अपनी बॉडी को, अपने शरीर को। और उसको क्या चाहिए ? उसको पानी की जरूरत है। मनुष्य को पानी की जरूरत है। तीन दिन, चार दिन, पांच दिन पानी न मिले तो वो गया। मैं फिजीकल नीड्स की बात कर रहा हूं जिसके बिना मनुष्य जीवित नहीं रह सकेगा। मैं टेलीविज़न की बात नहीं कर रहा हूं क्योंकि अगर कोई बिना भोजन के मर गया तो उसके लिए मेडिकल टर्म है — ‘स्टारवेशन’। वो मरा स्टारवेशन से। कोई अगर पानी के बिना मर गया तो उसके लिए भी मेडिकल टर्म है, वो मर गया ‘डि-हाइड्रेशन’ से। और अगर कोई मर गया बिना हवा के, ऑक्सीजन के तो उसके लिए भी मेडिकल टर्म है — ‘सफोकेशन’। पर अगर कोई मर गया बिना टी वी देखने के तो उसके लिए कोई मेडिकल टर्म नहीं है, क्योंकि वो इम्पॉर्टेन्ट नहीं है। मैं बात कर रहा हूं आपकी जरूरतें और आपकी चाहतों की। आपकी चाहतें हैं — आप टी वी देखें, आप मूवीज़ में जाएं, आप रेस्टोरेन्ट्स में जाएं, आप पार्टीज़ में जाएं, आप ये करें, वो करें, सोशल फंक्शन में जाएं, उस सोशल फंक्शन में जाएं पर आपके शरीर की जो नीड हैं, वो अलग हैं।