
एक चीज आपके पास पहले से ही है। उसका नाम है — शांति। जब आप खोजना शुरू करेंगे उसे बाहर नहीं, अंदर — उन चीजों को लेना शुरू करेंगे, जो आपके पास पहले से ही हैं तो आपको शांति भी उसमें जरूर मिलेगी। क्योंकि वो आपके अंदर पहले से ही है।

इतिहास साक्षी रहा है, सदा से ऐसे मार्गदर्शक हुए हैं जिन्होंने लोगों को बताया है कि उनके भीतर की शांति को कैसे प्रकट किया जाए। 8 नवंबर श्री हंस जी महाराज के पावन जन्मोत्सव हंस जयंती के रूप में सम्पूर्ण विश्व में मनायी जाती है। श्री हंस जी महाराज प्रेम रावत जी के पिता और मार्गदर्शक थे।
सदियों से चली आ रही इस गुरु-शिष्य परंपरा में एक कड़ी और जुड़ चुकी है — श्री हंस जी महाराज और प्रेम रावत जी की। यह एक ऐसा विलक्षण कार्यक्रम है जो व्यक्तिगत शांति पाने में सहायक है। इस अनुपम कार्यक्रम के पुनः प्रसारण का आनंद लें।

एक झलक:
कितने लोग हैं, जिनको अच्छा लगता है, जब उनको छुट्टी मिलती है? {श्रोतागण हाथ उठाते हैं!}
तकरीबन-तकरीबन सबको अच्छा लगता है।
तो एक दीवाल है, जिससे तुम आए और एक दीवाल है, जिससे तुमको जाना है। तो सोचो! इस दीवाल से पहले तुम क्या थे ? इस दुनिया में सबसे ज्यादा चीज क्या है ? जानते हो ? धूल! धूल! ये पृथ्वी धूल की बनी है। ये जो पत्थर देखते हो, ये धूल को कम्प्रेस किया हुआ है, उसके पत्थर हैं ये! उससे पत्थर बनते हैं।
तो समझ लो सारा विश्व, सारा-सारा संसार, सारा यूनिवर्स धूल, धूल, धूल, धूल, धूल, धूल से बना हुआ है। तुम क्या थे इससे पहले ? धूल थे! और जब उस दीवाल से जाओगे तो जानते हो क्या होगा ? फिर धूल बन जाओगे।
तो बनाने वाले ने तुमको धूल होने से छुट्टी दी है। ये तुम्हारी छुट्टी है! यह जीवन तुम्हारा, यह तुम्हारी छुट्टी है! तो मैं तो सिर्फ यह कहना चाहता हूं — तुम अपनी छुट्टी का मज़ा ले रहे हो या नहीं ?
- श्री प्रेम रावत, नई दिल्ली, भारत

एक झलक:
कोई ऐसी चीज मैं देना चाहता हूं आपको वचनों के द्वारा, जिससे आपके जीवन के अंदर सुख आये। मैं कुछ ऐसी चीज देना चाहता हूं आपको अपने वचनों के द्वारा कि आप विचार करें कि सचमुच में आप कितने भाग्यशाली हैं! ये स्वांस जो आपके अंदर आ रहा है, ये उस चीज का एक witness (गवाह) है कि आप पर उस परमपिता परमेश्वर की कृपा अभी भी है।
- श्री प्रेम रावत, देहरादून, उत्तराखंड, भारत

एक झलक :
शांति कब होगी ? शांति कब होगी ?
जब यह हृदय रूपी चिराग जलेगा, तब जाकर के यह अंधेरा हटेगा, उससे पहले नहीं। यह इतना घोर अंधेरा है, क्योंकि यह अंधेरा है अज्ञानता का। अज्ञानता का अंधेरा है। और जब तक यह अंधेरा रहेगा, तुम देख नहीं सकोगे, ठोंकरे खाते फिरोगे, क्योंकि तुम देख नहीं सकते हो। और जिस दिन यह हृदय रूपी चिराग, इसमें उजाला होगा, तब जाकर के तुमको दिखाई देगा कि असलियत क्या है।
- श्री प्रेम रावत

भूले मन समझ के लाद लदनियां।
थोड़ा लाद, बहुत मत लादे, टूट जाए तेरी गरदनियां।।
आनंद लेना शुरू करो अपने जीवन का। और लालच तुम्हारा जाएगा, गर्दन तुम्हारी बच जाएगी। टूटेगी नहीं और तुमको दुःखी नहीं होना पड़ेगा। और उस सुख में, उस आनंद में रह करके यह जीवन तुम बिता सकते हो।
- प्रेम रावत: बरैली, भारत