
इस शुभ अवसर के उपलक्ष्य में, श्री प्रेम रावत जी द्वारा अभी हाल ही रिकॉर्ड किये हुए संदेश का आनंद लें।
होली का पारंपरिक भारतीय त्यौहार बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। महत्वपूर्ण और समयोचित बात यह कि यह पर्व, बुराई पर अच्छाई की जीत और सारे भेदभाव भुला कर सद्भावना अपनाने की प्रेरणा भी देता है।
टाइमलेस टुडे की सदस्यता के द्वारा प्रेम रावत जी के इस 58 मिनट के विशेष संदेश का लुत्फ़ उठाएँ। श्री प्रेम रावत जी के इस हिंदी सम्बोधन का अंग्रेजी अनुवाद भी उपलब्ध है। फ्रेंच, जर्मन, इतालवी, पुर्तगाली, चीनी, स्पेनिश और तमिल में अनुवाद जल्द से जल्द उपलब्ध होंगे।
श्री प्रेम रावत जी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर इस पूर्ण संस्करण के अनुभाग का आनंद लें, (3 मिनट), शेयर करें और सब्स्क्राइब करें: YouTube.com/PremRawatOfficial
इस प्रेरक संदेश का आनंद लेने के लिए अपने प्रियजनों और परिवार को टाइमलेस टुडे की सदस्यता का उपहार दें और साथ ही सीधे प्रसारण, पूर्ण-संस्करण वीडियो और ऑडियो, पुनः प्रसारण, श्रृंखलाएं, वैश्विक आभासिक कार्यक्रम और बेहतरीन प्रीमियर विषयवस्तुओं तक असीमित प्रविष्टि प्रदान करें।

इतिहास साक्षी रहा है, सदा से ऐसे मार्गदर्शक हुए हैं जिन्होंने लोगों को बताया है कि उनके भीतर की शांति को कैसे प्रकट किया जाए। 8 नवंबर श्री हंस जी महाराज के पावन जन्मोत्सव हंस जयंती के रूप में सम्पूर्ण विश्व में मनायी जाती है। श्री हंस जी महाराज प्रेम रावत जी के पिता और मार्गदर्शक थे।
सदियों से चली आ रही इस गुरु-शिष्य परंपरा में एक कड़ी और जुड़ चुकी है — श्री हंस जी महाराज और प्रेम रावत जी की। यह एक ऐसा विलक्षण कार्यक्रम है जो व्यक्तिगत शांति पाने में सहायक है। इस अनुपम कार्यक्रम के पुनः प्रसारण का आनंद लें।

सभी लोगों को नए साल की मुबारकबाद देना चाहता हूँ मैं।
नया साल आ रहा है, और इस साल में लोगों की ख़्वाहिशें हैं कि कुछ ऐसा होना चाहिए, कुछ ऐसा होना चाहिए। परन्तु एक ख़्वाहिश हृदय की भी है। और जो हृदय की ख़्वाहिश है, अगर उसको हम किसी तरीके से पूरा कर पायें, क्योंकि उस हृदय की ख़्वाहिश में है शांति। उस हृदय की ख़्वाहिश में है सच्चा प्यार, उस हृदय की ख़्वाहिश में है आनंद। कैसा आनंद? परमानन्द का आनंद कि हमारे जीवन के अंदर हम उन चीज़ों का अनुभव कर पाएं, जो सचमुच में असली हैं, जो वास्तविकता रखती हैं।
बहुत कुछ होता है बाहर। हम अखबार पढ़ते हैं, आजकल अखबारों की कमी नहीं है। न्यूज़ की कमी नहीं है, जहां देखो न्यूज़ आ रही है। पहले तो यह था कि सबेरे का अखबार सबेरे पढ़ते थे, शाम का अखबार शाम को पढ़ते थे। अब जो नई-नई devices हैं, उनमें सारे दिन खबर आ रही है। तो ऐसी दुनिया के अंदर अगर कोई चाहे भी, तो क्या उसकी चाहत होनी चाहिए नए साल के लिए ? कि हमारे जीवन में आनंद हो। बंटवारा न हो हमारा। हमारे जीवन में आनंद हो, और हम सब मनुष्य जो इस पृथ्वी पर हैं, एक साथ होकर के आगे बढ़ पाएं। ताकि इसमें सभी का भला हो।
आजकल लोगों का भला, लोग सिर्फ इसी दृष्टि से देखते हैं कि "हमारा भला कैसे हो?" दूसरे का भला नहीं। परन्तु वो भला, जो हमारा भी भला हो और दूसरों का भी भला हो। वो है असली भला। और वही, उसी की ख़्वाहिश हृदय को है।
तो अगर ये हमारी चाहतें रहीं अगले साल के लिए, तो इसमें हमारी भी उन्नति होगी, और सारे संसार की भी उन्नति होगी। और यही कहकर के मैं... आप सभी लोगों को, ये wish करना चाहता हूँ कि नया साल जो आ रहा है, इसमें आपकी बहुत उन्नति हो, आपके जीवन के अंदर प्यार बढ़े, आपके जीवन के अंदर शान्ति बढ़े, और आपके जीवन के अंदर आनंद ही आनंद हो।
- प्रेम रावत

ऐंकर : हर पल को खूब जीओ, ये तो सब कहते हैं, लेकिन हर पल को जी भर के कैसे जिया जा सकता है ? ये दूसरा सवाल है।
प्रेम रावत जी : अगर तुम हर पल को जीना चाहते हो तो ‘पल’ क्या है, इसको समझने की कोशिश करो! ‘पल’, इस ‘पल‘ में से — अगर इसको समझना चाहते हो कि ये ‘पल‘ क्या है, जो अभी-अभी, अभी आया तुम्हारे पास। अभी-अभी आया। गया! अब गया! और अभी-अभी आया है! तो इसको अगर समझना चाहते हो तो इस ‘पल‘ में से ‘बीते वाले पल‘ को निकाल दो! और ‘आने वाले पल‘ को भी इस ‘पल‘ से निकाल दो! तो जो बचेगा वो है तुम्हारा असली ‘पल‘।
- प्रेम रावत, मुंबई

ऐंकर : हर पल को खूब जीओ, ये तो सब कहते हैं, लेकिन हर पल को जी भर के कैसे जिया जा सकता है ? ये दूसरा सवाल है।
प्रेम रावत जी : अगर तुम हर पल को जीना चाहते हो तो ‘पल’ क्या है, इसको समझने की कोशिश करो! ‘पल’, इस ‘पल‘ में से — अगर इसको समझना चाहते हो कि ये ‘पल‘ क्या है, जो अभी-अभी, अभी आया तुम्हारे पास। अभी-अभी आया। गया! अब गया! और अभी-अभी आया है! तो इसको अगर समझना चाहते हो तो इस ‘पल‘ में से ‘बीते वाले पल‘ को निकाल दो! और ‘आने वाले पल‘ को भी इस ‘पल‘ से निकाल दो! तो जो बचेगा वो है तुम्हारा असली ‘पल‘।
- प्रेम रावत, मुंबई

एक चीज आपके पास पहले से ही है। उसका नाम है — शांति। जब आप खोजना शुरू करेंगे उसे बाहर नहीं, अंदर — उन चीजों को लेना शुरू करेंगे, जो आपके पास पहले से ही हैं तो आपको शांति भी उसमें जरूर मिलेगी। क्योंकि वो आपके अंदर पहले से ही है।