
प्रेम रावत जी गुरु और शिष्य के सम्बन्ध की भारत की युगों-पुरानी परम्परा को मनाये जाने का सम्मान करते हैं।
यह वर्ष 54वां वार्षिकोत्सव है जब प्रेम ने आठ वर्ष की आयु में आत्म-ज्ञान के शिक्षक के रूप में जिम्मेदारी ली। मानवता के कल्याण के लिए प्रेम का समर्पण उन लोगों से कितना अलग हैं जो कोविड-19 महामारी से भयभीत हैं। उनका सरल और प्रभावशाली संदेश हम सभी को ‘‘अन्दर की दुनिया — असली दुनिया’’ का अनुभव प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है।
इसका वीडियो और ऑडियो अब अंग्रेजी से अनुवादित होकर हिन्दी में उपलब्ध है। आप टाइमलेस टुडे ऐप और वेबसाइट पर अपनी सदस्यता द्वारा किसी भी समय इसका आनंद ले सकते हैं।

एक झलक
एम् सी:
प्रेम जी, आप दुनिया के कोने कोने में जाकर लोगों से मिले हैं। उनको नज़दीक से जानने और समझने का मौका मिला है। क्या सबका दुःख, दर्द एक जैसा ही होता है ? क्या हर किसी को शांति की तलाश है ? क्या आपका संदेश उन सबके लिए एक ही है ?
श्री प्रेम रावत:
ये भी एक बड़ा अच्छा सवाल है। क्योंकि बनाने वाले को अच्छी तरीके से मालूम था, लोग कहेंगे "मैने कोने कोने में ढूँढा"। इसीलिए भगवान् ने इस सृष्टि को, इस पृथ्वी को गोल बना दिया, ताकि कोना है ही नहीं इसमें।
दुःख के कारण अलग अलग हैं। दुःख के कारन अलग अलग हैं। पर दुःख का एहसास वही है।

कितने धर्म हैं! धर्म का मूल कारण क्या है ? मूल चीज क्या है धर्म की ?
धर्म है एक उंगली, जो भगवान की तरफ इशारा करती है। मनुष्य... कहां इशारा कर रही है, ये तो सब भूल गए, उंगली के पीछे पड़ गए। "अब इस उंगली में ये होना चाहिए, ऐसी उंगली होनी चाहिए! इस उंगली में यहां चांदी का ये होना चाहिए! जरी का ये होना चाहिए, वहां का ये होना चाहिए, इसका वो होना चाहिए।"
उंगली के पीछे काहे के लिए पड़ गए ? उंगली तो सिर्फ इशारा करने के लिए है! इशारा कहां कर रही है ? वो तो देख नहीं रहे हैं। पर उंगली के पीछे पड़ गए। उंगली के पीछे, उंगली दबाओ! उंगली इशारा करते-करते थक गई है। तो कोई उंगली दबाने में लगा है। "इस उंगली को और सुंदर बनाओ! इस उंगली के नाखून की पॉलिश करो! इसमें नेल-पॉलिश लगाओ! इसमें ये करो! उसमें वो करो! इस उंगली को खतरा है! इस उंगली को बचाओ! इस उंगली के चारों तरफ बंदूक ही बंदूक हो!" पर इशारा कहां है ? ये कोई नहीं देखता है।
इशारा क्या है ? और इशारा है कि मैं — वो दिव्य-शक्ति कह रही है कि "तुझे मेरी जरूरत है! तू इधर-उधर मत देख! तू इधर-उधर मत देख, मेरी तरफ देख!"
- श्री प्रेम रावत - बिर्मिंघम, UK

कितने धर्म हैं! धर्म का मूल कारण क्या है ? मूल चीज क्या है धर्म की ?
धर्म है एक उंगली, जो भगवान की तरफ इशारा करती है। मनुष्य... कहां इशारा कर रही है, ये तो सब भूल गए, उंगली के पीछे पड़ गए। "अब इस उंगली में ये होना चाहिए, ऐसी उंगली होनी चाहिए! इस उंगली में यहां चांदी का ये होना चाहिए! जरी का ये होना चाहिए, वहां का ये होना चाहिए, इसका वो होना चाहिए।"
उंगली के पीछे काहे के लिए पड़ गए ? उंगली तो सिर्फ इशारा करने के लिए है! इशारा कहां कर रही है ? वो तो देख नहीं रहे हैं। पर उंगली के पीछे पड़ गए। उंगली के पीछे, उंगली दबाओ! उंगली इशारा करते-करते थक गई है। तो कोई उंगली दबाने में लगा है। "इस उंगली को और सुंदर बनाओ! इस उंगली के नाखून की पॉलिश करो! इसमें नेल-पॉलिश लगाओ! इसमें ये करो! उसमें वो करो! इस उंगली को खतरा है! इस उंगली को बचाओ! इस उंगली के चारों तरफ बंदूक ही बंदूक हो!" पर इशारा कहां है ? ये कोई नहीं देखता है।
इशारा क्या है ? और इशारा है कि मैं — वो दिव्य-शक्ति कह रही है कि "तुझे मेरी जरूरत है! तू इधर-उधर मत देख! तू इधर-उधर मत देख, मेरी तरफ देख!"
- श्री प्रेम रावत - बिर्मिंघम, UK

एक झलक:
एक जगह है, जहां असली रोशनी है और वह आपके अंदर है। और जबतक आप उसको नहीं जानोगे, तबतक आप अपने आपको नहीं पहचानोगे, क्योंकि आपका स्वरूप और कुछ नहीं, वो है! और जबतक अपने आपको नहीं जानोगे, आपके जीवन के अंदर शांति हो ही नहीं सकती।
"पीस एम्बेसडर" कहा था मेरे को, मेरे ख्याल से किसी ने।
पीस एम्बेसडर, पीस एम्बेसडर, पीस एम्बेसडर — पता नहीं क्या पीस एम्बेसडर ?
एक बार मैं था रेडक्रॉस ब्लड डोनर्स ड्राईव, इटली में — मैंने कहा कि सभी लोगों को "पीस एम्बेसडर" होना चाहिए। सभी लोगों को! शांति की बात करता हूं मैं, परंतु शांति तब तक संभव नहीं होगी, जबतक तुम अपने आपको नहीं पहचानोगे। हो ही नहीं सकती।
जब तक ये नहीं जानोगे कि शांति तुम्हारी चाह नहीं है, तुम्हारी जरूरत है।
- प्रेम रावत, बैंगलूरु, कर्नाटक

एक झलक:
एक जगह है, जहां असली रोशनी है और वह आपके अंदर है। और जबतक आप उसको नहीं जानोगे, तबतक आप अपने आपको नहीं पहचानोगे, क्योंकि आपका स्वरूप और कुछ नहीं, वो है! और जबतक अपने आपको नहीं जानोगे, आपके जीवन के अंदर शांति हो ही नहीं सकती।
"पीस एम्बेसडर" कहा था मेरे को, मेरे ख्याल से किसी ने।
पीस एम्बेसडर, पीस एम्बेसडर, पीस एम्बेसडर — पता नहीं क्या पीस एम्बेसडर ?
एक बार मैं था रेडक्रॉस ब्लड डोनर्स ड्राईव, इटली में — मैंने कहा कि सभी लोगों को "पीस एम्बेसडर" होना चाहिए। सभी लोगों को! शांति की बात करता हूं मैं, परंतु शांति तब तक संभव नहीं होगी, जबतक तुम अपने आपको नहीं पहचानोगे। हो ही नहीं सकती।
जब तक ये नहीं जानोगे कि शांति तुम्हारी चाह नहीं है, तुम्हारी जरूरत है।
- प्रेम रावत, बैंगलूरु, कर्नाटक