
एक झलक:
अंगूठी कई बार डब्बे में आती है। नहीं ? लाल जैसा डब्बा होता है, उसमें आती है। नहीं ? अच्छा! आपकी समझ में अंगूठी की कीमत ज्यादा है या डब्बे की कीमत ज्यादा है ? अंगूठी! तो बिना अंगूठी के डब्बा क्या है ? कुछ नहीं है। पर जबतक उस डब्बे में अंगूठी है, तबतक आप उस डब्बे की भी देखभाल करेंगे। नहीं ? उसको ठीक ढंग से रखेंगे। जबतक उसमें अंगूठी है। और जब उसमें से अंगूठी निकल गई......। जबतक इस डब्बे में {शरीर की तरफ इशारा करते हुए} ये स्वांस आ रहा है, जा रहा है, आपको इस डब्बे की कीमत समझनी है। और जिस दिन इसमें से ये स्वांस आना-जाना बंद हो जाएगा, इस डब्बे की कोई कीमत नहीं रहेगी। पर जबतक है, तबतक इस डब्बे की कीमत उतनी ही है, जितनी उस अंगूठी की है।
- प्रेम रावत

एक झलक:
बात करेंगे शांति की — हम बात करते हैं — चलिए! आप अपनी family से चालू करिए! वहां से चालू करिये, जहां वो लोग हैं, जिनसे आपको स्नेह है, जिनसे आपको प्यार है! Those people who you love, start with that.
दुनिया भर के लिए टाइम है, परंतु अपनी family के लिए टाइम नहीं है — मैं लेट हो गया! मैं लेट हो गया, मैं लेट हो गया, मैं लेट हो गया, मैं लेट हो गया। मैं लेट हो गया। और काहे के लिए लेट हो गये ? क्या लेट हो गए ? ताकि और लोगों के साथ बैठ के गपशप मार सकें।
अगर आपके पास सिर्फ गपशप के लिए टाइम है, अगर आपकी priority में — आपके जीवन की priority में गपशप है सिर्फ, तो यह स्पष्ट है कि आप वहां कार के steering wheelके पीछे बैठे तो जरूर हैं, पर गाड़ी कोई चला नहीं रहा है। और यह गाड़ी किसी चीज के साथ जरूर जाकर टकरायेगी और उसको कहते हैं — गुस्सा आना! क्योंकि कोई चला नहीं रहा है।
- प्रेम रावत

एक झलक:
बात करेंगे शांति की — हम बात करते हैं — चलिए! आप अपनी family से चालू करिए! वहां से चालू करिये, जहां वो लोग हैं, जिनसे आपको स्नेह है, जिनसे आपको प्यार है! Those people who you love, start with that.
दुनिया भर के लिए टाइम है, परंतु अपनी family के लिए टाइम नहीं है — मैं लेट हो गया! मैं लेट हो गया, मैं लेट हो गया, मैं लेट हो गया, मैं लेट हो गया। मैं लेट हो गया। और काहे के लिए लेट हो गये ? क्या लेट हो गए ? ताकि और लोगों के साथ बैठ के गपशप मार सकें।
अगर आपके पास सिर्फ गपशप के लिए टाइम है, अगर आपकी priority में — आपके जीवन की priority में गपशप है सिर्फ, तो यह स्पष्ट है कि आप वहां कार के steering wheelके पीछे बैठे तो जरूर हैं, पर गाड़ी कोई चला नहीं रहा है। और यह गाड़ी किसी चीज के साथ जरूर जाकर टकरायेगी और उसको कहते हैं — गुस्सा आना! क्योंकि कोई चला नहीं रहा है।
- प्रेम रावत

एक झलक:
प्रश्नकर्त्ता : तो सर! मेरा सवाल है, आपने बोला था कि मोमबत्ती वाला जो example दिया है कि एक जलती मोमबत्ती दूसरी को जलाएगी। लेकिन ये प्रैक्टिकली हम देखें तो वैसा नहीं होता। जैसे अगर घर में बाहर या ऑफिस में हम कहीं भी कोई गलत काम कर रहा है। जैसे, मान लो मैं — example, मैं रोकता हूं उसको तो झगड़े का chances हैं। पता उसको भी है, वह गलत काम कर रहा है। और झगड़े के बाद मेरे साथी मुझे बोलते हैं कि —
यार! तेरे को क्या प्रॉब्लम थी ? तू क्यों बोल रहा है उसके बीच में ?
और दूसरा, सर! एक — मैं जैसे नार्मली, सभी फैमिली में, घर में सिखाया जाता है कि दूसरे के पचड़े से बच के रहो! तो वो कैसे सर, हम शांति के लिए जा सकते हैं ? जब हम दूसरे के पचड़े में पड़ेंगे नहीं तो शांति कहां से आएगी ?
प्रेम रावत जी : देखिए! जिस मटके में छेद है, उसमें आप कितना पानी डाल सकते हैं ?
प्रश्नकर्त्ता : डलेगा ही नहीं सर! जितना डालेंगे, सर! निकल जाएगा!
प्रेम रावत जी : मतलब, सारे समुद्र जितने भी हैं इस पृथ्वी पर, उसका सारा पानी उसके पास डाल सकते हैं, पर उसमें एक बूंद नहीं टिकेगी।
ठीक है न जी ?
उसमें कुछ नहीं टिकेगा। छेद है। ...

एक झलक:
प्रश्नकर्त्ता : तो सर! मेरा सवाल है, आपने बोला था कि मोमबत्ती वाला जो example दिया है कि एक जलती मोमबत्ती दूसरी को जलाएगी। लेकिन ये प्रैक्टिकली हम देखें तो वैसा नहीं होता। जैसे अगर घर में बाहर या ऑफिस में हम कहीं भी कोई गलत काम कर रहा है। जैसे, मान लो मैं — example, मैं रोकता हूं उसको तो झगड़े का chances हैं। पता उसको भी है, वह गलत काम कर रहा है। और झगड़े के बाद मेरे साथी मुझे बोलते हैं कि —
यार! तेरे को क्या प्रॉब्लम थी ? तू क्यों बोल रहा है उसके बीच में ?
और दूसरा, सर! एक — मैं जैसे नार्मली, सभी फैमिली में, घर में सिखाया जाता है कि दूसरे के पचड़े से बच के रहो! तो वो कैसे सर, हम शांति के लिए जा सकते हैं ? जब हम दूसरे के पचड़े में पड़ेंगे नहीं तो शांति कहां से आएगी ?
प्रेम रावत जी : देखिए! जिस मटके में छेद है, उसमें आप कितना पानी डाल सकते हैं ?
प्रश्नकर्त्ता : डलेगा ही नहीं सर! जितना डालेंगे, सर! निकल जाएगा!
प्रेम रावत जी : मतलब, सारे समुद्र जितने भी हैं इस पृथ्वी पर, उसका सारा पानी उसके पास डाल सकते हैं, पर उसमें एक बूंद नहीं टिकेगी।
ठीक है न जी ?
उसमें कुछ नहीं टिकेगा। छेद है। ...

प्रेम रावत जी गुरु और शिष्य के सम्बन्ध की भारत की युगों-पुरानी परम्परा को मनाये जाने का सम्मान करते हैं।
यह वर्ष 54वां वार्षिकोत्सव है जब प्रेम ने आठ वर्ष की आयु में आत्म-ज्ञान के शिक्षक के रूप में जिम्मेदारी ली। मानवता के कल्याण के लिए प्रेम का समर्पण उन लोगों से कितना अलग हैं जो कोविड-19 महामारी से भयभीत हैं। उनका सरल और प्रभावशाली संदेश हम सभी को ‘‘अन्दर की दुनिया — असली दुनिया’’ का अनुभव प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है।
इसका वीडियो और ऑडियो अब अंग्रेजी से अनुवादित होकर हिन्दी में उपलब्ध है। आप टाइमलेस टुडे ऐप और वेबसाइट पर अपनी सदस्यता द्वारा किसी भी समय इसका आनंद ले सकते हैं।